Tuesday, January 20, 2026

वर्ष 2026 के महत्वपूर्ण खेल आयोजन और भारत की उम्मीदें

 

 


      वर्ष 2026 की शुरुआत के साथ ही विश्व खेल-जगत में उत्साह और रोमांच की नई लहर दौड़ पड़ी है। यह वर्ष खेल प्रेमियों के लिए केवल प्रतियोगिताओं का कैलेंडर नहीं, बल्कि संघर्ष, सपनों और स्वर्णिम उपलब्धियों की संभावनाओं से भरा एक उत्सव है। आने वाले महीनों में दुनिया भर के खेल मैदानों से जयकारों की गूंज, रिकॉर्ड टूटने की आहट और नए नायकों के उदय की कहानियाँ सुनाई देंगी।

     भारत के दृष्टिकोण से यह वर्ष विशेष महत्व रखता है। हॉकी विश्व कप, टी-20 क्रिकेट विश्व कप, एशियाई खेल और राष्ट्रमंडल खेलये सभी आयोजन भारत को अपनी खेल-शक्ति और आत्मविश्वास का परिचय देने का सुनहरा अवसर प्रदान करेंगे। वहीं वैश्विक मंच पर फुटबॉल विश्व कप, शीतकालीन ओलंपिक और विश्व बैडमिंटन कप भी खेल-जगत को नई ऊँचाइयों पर ले जाने को तैयार हैं।

     नए वर्ष में भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती और अवसर टी-20 क्रिकेट विश्व कप है, जिसका आयोजन 7 फरवरी से 8 मार्च तक भारत और श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में होगा। भारत मौजूदा टी-20 विश्व विजेता है और सूर्यकुमार यादव के नेतृत्व में अपने घरेलू मैदानों पर खिताब की रक्षा कर इतिहास रचने का सुनहरा अवसर उसके पास है।

     इसी क्रम में महिला टी-20 क्रिकेट विश्व कप 12 जून से 5 जुलाई तक इंग्लैंड में खेला जाएगा। वर्ष 2025 में हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में भारत द्वारा एकदिवसीय विश्व कप जीतना महिला क्रिकेट के लिए मील का पत्थर साबित हुआ था। यदि भारतीय महिला टीम टी-20 विश्व कप भी अपने नाम कर लेती है, तो यह महिला क्रिकेट के स्वर्णिम अध्याय में एक और चमकदार पन्ना जोड़ देगा।

     हॉकी विश्व कप का आयोजन अगस्त 2026 में बेल्जियम और नीदरलैंड की संयुक्त मेजबानी में होगा। भारत ने अब तक केवल एक बार—1975 में अजीतपाल सिंह की कप्तानी मेंहॉकी विश्व कप जीता है। पिछले दो ओलंपिक खेलों में लगातार कांस्य पदक जीतकर भारतीय हॉकी ने अपनी पुनर्जागरण की कहानी लिखी है। अब देश को पचास वर्षों के लंबे इंतजार के अंत की उम्मीद है। सवाल यही हैक्या 2026 स्वर्णिम अतीत की वापसी का साक्षी बनेगा?

     इसी वर्ष राष्ट्रमंडल खेल 23 जुलाई से 6 अगस्त तक स्कॉटलैंड के ग्लास्गो शहर में आयोजित होंगे। पिछले राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने 22 स्वर्ण सहित कुल 61 पदक जीतकर चौथा स्थान प्राप्त किया था। हालांकि इस बार हॉकी, कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस और स्क्वैश जैसे खेलों के शामिल न होने से चुनौती बढ़ गई है। इसके बावजूद एथलेटिक्स में भारत से अच्छे प्रदर्शन की अपेक्षा की जा रही है। उल्लेखनीय है कि 2030 में अगला राष्ट्रमंडल खेल भारत के अहमदाबाद शहर में होगा, जिससे 2026 के खेल भारतीय दर्शकों के लिए और भी विशेष बन जाते हैं।

     राष्ट्रमंडल खेलों के तुरंत बाद एशियाई खेलों का आयोजन 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक जापान के नागोया शहर में होगा। भारत एशियाई खेलों का संस्थापक सदस्य रहा है और 1951 से लेकर अब तक प्रत्येक संस्करण में उसकी सहभागिता रही है। पिछले एशियाई खेलों में भारत ने 28 स्वर्ण सहित कुल 106 पदक जीतकर ऐतिहासिक प्रदर्शन किया था। हाल के वर्षों में खेल अवसंरचना और खिलाड़ियों के प्रदर्शन में आई उल्लेखनीय प्रगति को देखते हुए, उम्मीद है कि भारत इस बार नए कीर्तिमान स्थापित करेगा।

     वर्ष 2026 में भारत को विश्व बैडमिंटन कप की मेजबानी का गौरव भी प्राप्त होगा। यह प्रतिष्ठित प्रतियोगिता 17 से 23 अगस्त तक नई दिल्ली में आयोजित की जाएगी। भारत की ओर से अब तक केवल पी. वी. सिंधु ने 2019 में इस प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता है। हाल के वर्षों में सात्विक-चिराग की जोड़ी ने विश्व मंच पर भारत का नाम रोशन किया है। सिंधु के साथ-साथ इस जोड़ी से भी पदक की प्रबल उम्मीदें हैं।

     फीफा फुटबॉल विश्व कप, जिसे फुटबॉल का महाकुंभ कहा जाता है, 12 जून से 26 जुलाई तक अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको की संयुक्त मेजबानी में आयोजित होगा। भले ही भारतीय टीम इस प्रतियोगिता के लिए क्वालीफाई न कर पाई हो, लेकिन भारत में फुटबॉल प्रेमियों का जुनून किसी से कम नहीं है। यह अब तक का सबसे बड़ा फीफा विश्व कप होगा, जिसमें 48 टीमें भाग लेंगी। 2022 में कतर में हुए विश्व कप में लियोनेल मेसी के जादुई खेल के दम पर अर्जेंटीना ने खिताब जीता था। संभवतः यह मेसी और क्रिस्टियानो रोनाल्डो दोनों का अंतिम विश्व कप होगा, जिससे यह आयोजन भावनात्मक रूप से भी ऐतिहासिक बन जाता है।

     कुल मिलाकर, प्रतियोगिताओं और संभावनाओं की दृष्टि से वर्ष 2026 खेल जगत के लिए अविस्मरणीय होने जा रहा है। यदि भारत इन मंचों पर अपनी प्रतिभा, अनुशासन और आत्मविश्वास का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करता है, तो यह वर्ष न केवल वैश्विक खेल इतिहास में, बल्कि भारतीय खेल चेतना में भी स्वर्ण अक्षरों में अंकित हो जाएगा।

                                        

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Thursday, December 25, 2025

भारतीय खेल जगत 2025: उपलब्धियों के बीच विवादों की कसक

 

वर्ष 2025 भारतीय खेल जगत के लिए एक ऐसा वर्ष रहा, जिसमें उपलब्धियों की चमक के साथ-साथ विवादों की छाया भी लगातार बनी रही। खेल, जो अनुशासन, निष्पक्षता और सौहार्द का प्रतीक माना जाता है, कई बार प्रशासनिक लापरवाही, राजनीतिक हस्तक्षेप और सुरक्षा चूक के कारण चर्चा के केंद्र में रहा।

सबसे अधिक विवाद क्रिकेट से जुड़े रहे। एशिया कप और अन्य बहुपक्षीय टूर्नामेंटो में भारत-पाकिस्तान मुकाबलों के दौरान खिलाड़ियों द्वारा पारंपरिक हैंडशेकसे दूरी बनाए रखने की घटनाएँ सामने आईं। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने इसे खेल भावना के विरुद्ध बताते हुए औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई। भारत की ओर से स्पष्ट किया गया कि  राष्ट्रीय भावना सर्वोपरि है और जब पाकिस्तान भारत में लगातार आतंकवादी घटनाओं को अंजाम दे रहा है तब हैंड शेक की परंपरा को निभाना राष्ट्रीय भावनाओं के विपरीत होगा।

      इसी क्रम में एशिया कप 2025 के दौरान ट्रॉफी प्रस्तुति से जुड़ा प्रोटोकॉल विवाद भी सुर्खियों में रहा। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष और वर्तमान में एशिया  क्रिकेट परिषद के अध्यक्ष मोहसीन नक़वी से भारतीय टीम द्वारा एशिया कप  की विजेता ट्रॉफी लेने से इंकार के बाद भी  मोहसीन नक़वी स्वयम ट्रॉफी प्रदान करने पद अड़े रहे। नतीजा एक घंटे की नाटकीयता के बाद चैम्पियन होने के वाबजूद भारतीय टीम बिना ट्रॉफी जीते लौटी। यह घटना मीडिया और सोशल मीडिया में व्यापक चर्चा का विषय बनी। नक़वी के इस कृत्य की चौतरफा आलोचना हुई , साथ ही आयोजन से जुड़े अस्पष्ट नियम और समन्वय की कमी ने खेल प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े किए। यह घटना बताती है कि बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में स्पष्ट दिशा-निर्देश और संवेदनशील कूटनीतिक समझ कितनी आवश्यक है।



      आईपीएल 2025 जैसे विश्वस्तरीय टूर्नामेंट में भी विवादों की कमी नहीं रही। कुछ मैचों के बाद स्टेडियमों के बाहर भारी भीड़, अव्यवस्थित यातायात और सुरक्षा चूक की स्थितियाँ सामने आईं। मनोरंजन और व्यावसायिक सफलता के इस दौर में दर्शकों की सुरक्षा को लेकर उठे सवाल यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि क्या आयोजनकर्ता और प्रशासन जन-सुरक्षा को पर्याप्त प्राथमिकता दे पा रहे हैं।

      क्रिकेट से इतर अन्य खेलों में भी समस्याएँ उभरकर सामने आईं। विश्व विश्वविद्यालय खेल 2025 में भारतीय खिलाड़ियों का नामांकन समय पर न हो पाने के कारण कई प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को प्रतियोगिता से बाहर होना पड़ा। यह घटना केवल एक प्रशासनिक त्रुटि नहीं, बल्कि उन खिलाड़ियों के करियर पर सीधा आघात थी, जिनका इन खेलों में प्रदर्शन भविष्य तय कर सकता था। इस विवाद ने खेल प्रशासन की संरचनात्मक कमजोरी को उजागर किया।

      भारतीय फुटबॉल भी 2025 में अनिश्चितता के दौर से गुज़रा। अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ और व्यावसायिक साझेदारों के बीच मतभेदों के कारण इंडियन सुपर लीग के आयोजन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रही। इसका सीधा असर खिलाड़ियों, क्लबों और सहायक कर्मचारियों पर पड़ा, जो खेल के व्यवसायीकरण के साथ मज़बूत और स्थिर ढाँचे की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

      इसके अलावा, कुछ राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में रेफरी के फैसलों पर विवाद, अनुशासनहीन व्यवहार और टकराव की घटनाएँ भी सामने आईं। ये घटनाएँ बताती हैं कि जमीनी स्तर पर खेल संस्कृति को सुदृढ़ करने और नैतिक प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

      समग्र रूप से देखा जाए तो वर्ष 2025 के अधिकांश विवाद खिलाड़ियों की क्षमता से नहीं, बल्कि प्रशासन, प्रबंधन और नीति-निर्धारण से जुड़े रहे। भारत को वर्ष 2030 में राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी करनी है। अत: आवश्यक है कि पारदर्शी प्रशासन, मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, राजनीतिक हस्तक्षेप से दूरी और खिलाड़ी-केंद्रित नीतियों पर ध्यान केन्द्रित क्या जाये।  सिर्फ पदक प्राप्त करना ही किसी भी खेल आयोजन  का एकमात्र लक्ष्य नहीं होता बल्कि ऐसे आयोजन विवाद रहित भी होने चाहिए।

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Friday, September 5, 2025

 

Why book reading habit is declining

Not so far, there was a time when everywhere in journey, in coffee house, and other places  people were seen carrying and many times reading a book. It was a normal feature, in fact book reading was considered most important off time activity. Now time has gradually changed to a situation where everywhere , you see people carrying a mobile or Laptop. It appears , no one is interested in book reading.  I am not talking about career or course books , which people still reads for examination purposes. Many sociologists feel that this is not a healthy sign . Changing habits of masses may leads to some very dangerous situation , particulary with personality development.

Now first analyse why book reading habit is falling so rapidly.

1.      Digital Distraction – With the rise of smartphones, streaming platforms, social media, and gaming, people often choose quick, engaging digital content over long-form reading. Everything is available in fraction of seconds with a single touch or push button . Why go for lengthy process of searching and finding a book.

2.     Shorter Attention Spans – Constant scrolling and bite-sized content  like reels, tweets, shorts etc  have reduced people’s patience and focus, making it harder to commit to the slow, immersive process of reading books.

3.     Busy Lifestyles & Time Pressure – Modern work schedules, long commutes, and daily stress leave little leisure time, so reading often takes a backseat compared to more passive activities like watching videos.

4.     Shift in Information Consumption – People now rely on online articles, blogs, podcasts, and audiobooks to get information quickly instead of reading full-length books.

5.     Decline in Reading Culture & Motivation – Peer influence, lack of encouragement at home/schools, and fewer community initiatives promoting reading reduce people’s natural inclination toward books.

Now let us assess its impact on our body and mind. Five distinct effects are certainly visible:

1.      Reduced Attention Span -Constant exposure to fast digital content makes the mind restless, reducing the ability to focus deeply on one task.

2.     Weaker Critical Thinking/Imagination-Reading books develops imagination, creativity, and analytical skills. Without it, people may struggle with original thinking and rely more on digital unvarified information.

3.      Decline in Communication & Vocabulary Skills-Excess digital gadgets use limits vocabulary growth, weakens expression, and reduces the ability to communicate thoughtfully.

4.     Increased Anxiety & Emotional Instability-Overexposure to social media, gaming, or digital comparisons can make a person more anxious, impatient, and emotionally reactive compared to the calm mindset nurtured by reading.

5.     Loss of Empathy & Depth in Personality-Reading, especially stories and literature, builds empathy by allowing readers to step into others’ lives. Without this, a person may become more self-centered and less emotionally mature.

 

Now what should we do ? What is the solution? We are fully aware that in today’s world digital gadgets are necessary. You simply can’t ignore it. So let us summarise some practical solution:

1.     Digital-Reading Balance

o   Set aside at least 20–30 minutes daily for book reading (physical or e-books) alongside digital use.

2.     Mindful Screen Time

o   Limit unnecessary scrolling by using app timers, focus modes, or scheduled “digital detox” breaks.

3.     Use Technology for Learning

o   Choose educational apps, e-libraries, or audiobooks that promote knowledge instead of only entertainment.

4.     Strengthen Offline Habits

o   Build non-digital hobbies (journaling, painting, outdoor activities) to balance gadget use and reduce dependency.

5.     Encourage Reading Culture

o   Join book clubs, reading challenges, or family reading hours to make books a social and enjoyable habit.

May habit of book reading never stops…..

 

Thursday, March 14, 2024

इंग्लैंड के विरूद्ध भारत की ऐतिहासिक जीत

 धर्मशाला में पांचवे टेस्टे के तीसरे ही दिन भारत ने इंग्लैंड को एक पारी और ६४ रनों से हराकर टेस्ट श्रंखला 4 - 1 से जीतकर नया इतिहास रच दिया. टेस्ट क्रिकेट के लगभग 150 वर्षों के इतिहास में में ये मात्र चौथा मौका था जब किसी श्रंखला में पहला टेस्ट हारने के बाद किसी टीम ने लगातार चार टेस्ट मैच जीते हैं. 

विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में और विश्व टी 20 कप के फाइनल में हार से भारतीय क्रिकेट प्रेमियों में व्याप्त  निराशा अब बहुत हद तक दूर हो गई है.

हाल के वर्षों में इंग्लैंड ने बेजबौल तकनीक का इस्तेमाल किया था जिसमे टीम के रन बनाने की गति तेज होती है. पहले टेस्ट में कुछ हद तक इंग्लैंड की टीम सफल रही लेकिन बाद के मैचों  में यह तकनीक बुरी तरह फ्लॉप साबित हुई और भारतीय स्पिनर्स के आगे उनकी कुछ नहीं चली. 

हालाँकि घरेलु मैदान पर भारत का रिकॉर्ड बहुत अच्छा रहा है और किसी भी मेहमान टीम के लिए भारत को हराना मुश्किल होता है लेकिन इस तरह से एकतरफा जीत का अनुमान किसी को भी नहीं था . 

उम्मीद के अनुसार विकेट स्पिनर्स के अनुकूल रहे और दोनों टीमों के स्पिनर्स ने इनका भरपूर फ़ायदा उठाया . भारत और इंग्लैंड के सोइनरों ने पांच मैचों की इस श्रंखला में कुल 129 विकेट लेकर 100 वर्षों पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया. इससे पहले वर्ष  1924 - 1925 में इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में खेले गए टेस्ट सीरीज में स्पिनर्स ने कुल 128 विकेट लेने का रिकॉर्ड बनाया था. इस टेस्ट सीरीज में भारत  की और से सर्वाधिक विकेट रामचंद्र आश्विन ने लिया उन्होंने कुल 26  विकेट चटकाए जबकि इंग्लैंड के टॉम हार्टली ने 22  विकेट लिए.  धर्मशाला टेस्ट आश्विन का 100वां टेस्ट था और इसमें भी कुल 9 विकेट लेकर आश्विन ने अपनी छाप छोड़ी . 



हरने के वावजूद इंग्लैंड के जेम्स एंडरसन  के लिए ये सीरीज यादगार रही . धर्मशाला टेस्ट में उन्होंने 700  विकेट उरे कर लिए और इस प्रकार टेस्ट मैचों में 700 विकेट लेने वाले पहले तेज गेंदबाज बन गए हैं. इनसे अधिक विकेट सिर्फ शेन वार्न और मुथैया मुरलीधरन के नाम है. 

इस सीरीज में भारतीय क्रिकेट के लिए बहुत शुभ संकेत दिखे. भारत ने पांच नए खिलाडियों आजमाया और इनमे से चार ने अपनी प्रतिभा के झंडे गाड़ दिए. सिर्फ पाटीदार ही असफल रहे. 

    इनमे सबसे अधिक प्रभावित किया ध्रुव जुरैल ने. राजकोट और रांची टेस्ट में जुरैल ने भारत को जीत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और बहुतों को इनमे धोनी की छाप भी दिखाई दे रही है. रांची टेस्ट के चौथे दिन भारत 192 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए एक समय एक विकेट के नुक़सान पर 99 रन बना चुका था.जीत सहज दिख रही थी, लेकिन अचानक से 21 रनों के भीतर चार खिलाड़ी आउट हो गए. दबाव पूरी तरह से टीम इंडिया पर आ गया.इन हालात में शुभमन गिल को दूसरे छोर पर शिकन तक नहीं आई. वह इसलिए क्योंकि उन्हें पता था कि साथ देने के लिए जुरेल है.जुरेल ने फिर से नाबाद 39 रनों की पारी खेली. इसके चलते उन्हें प्लेयर ऑफ़ द मैच का पुरस्कार भी मिला.

    राजकोट में भी पहली पारी में जब जुरेल बल्लेबाज़ी के लिए आए थे तो 155 रन पर ही टीम इंडिया के 5 विकेट गिर चुके थे. जल्द ही ये स्कोर 7 विकेट के नुकसान 177 रन में बदल गया.इन अति दबाव वाले हालात में भी जुरेल ने मैच के तीसरे दिन लंच तक आक्रामकता और सूझबूझ के बीच तालमेल दिखाते हुए 90 रन की पारी खेलकर भारत के लिए जीत का राष्ट प्रशस्त किया. 




दुसरे खिलाड़ी जिसने सबसे ज्यादा प्रभावित किया वे हैं सरफ़राज़ . सरफ़राज़ के बारे में अक्सर ये शिकायत रहती है कि उन्हें मौका नहीं दिया जा रहा है और जब उन्हें मौका मिला तो अपने चयन को सरफ़राज़ ने सही साबित किया. छठे नंबर पर कई पारियों में सरफ़राज़ ने ठोस और जरुरत के अनुसार तेज़ बल्लेबाजी भी की. 




रांची में जब जसप्रीत बुमरा उपलब्ध नहीं थे तो सिराज के साथ तेज़ गेंदबाजी के लिए आकाशदीप को चुना गया और अपने पहले ही टेस्ट मैच में आकाशदीप ने सटीक गेंदबाजी कर 3 विकेट चटकाए. 


अंतिम टेस्ट में देवदत्त  पद्दिकल को आजमाया गया और अर्ध शतक बनाकर उन्होंने भी अपनी उपयोगिता साबित की. इससे ये साबित होता है की भारत बेंच स्ट्रेंथ काफी मज़बूत है . विरत कोहली पूरी सेइरिएस में नहीं खेले. रविन्द्र जडेजा भी दो मैचों में उपलब्ध नहीं थे. रिषभ पन्त और शमी जैसे स्थापित खिलाडी भी खेलने की स्थिति में नहीं थे . 

ये भविष्य के लिए बहुत ही शुभ संकेत है. 

अब आइये बात करते हैं श्रंखला के भारतीय हीरो खिलाडियों की. सबसे पहले यशस्वी जैसवाल. इस सीरीज में बैजबॉल का तोड़ 'जायसवाल का जैसबॉल' बना. यशस्वी ने पूरी सीरीज में अटैकिंग अंदाज में बल्लेबाजी की. यशस्वी ने इस सीरीज में कुल 9 पारियों में सर्वाधिक 712 रन बनाए, जिसमें दो दोहरे शतक और तीन अर्धशतक शामिल रहे. इस दौरान यशस्वी का स्ट्राइक रेट 79.91 और औसत 89.00 रहा. यशस्वी ने 68 चौके और 26 छक्के लगाए. 22 साल के यशस्वी ने विशाखापत्तनम टेस्ट मैच में 209 रनों की पारी खेली थी. फिर राजकोट टेस्ट में भी इस युवा खिलाड़ी ने भारत की दूसरी पारी में 214 रन बना डाले. फिर रांची और धर्मशाला टेस्ट मैच में भी यशस्वी का प्रदर्शन शानदार रहा. यशस्वी इस शानदार प्रदर्शन के चलते 'प्लेयर ऑफ द सीरीज' चुने गए.

दुसरे हीरो रहे रामचंद्र आश्विन. अनुभवी ऑफ-स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने धर्मशाला में अपने टेस्ट करियर का 100वां मैच खेला. अश्विन इस सीरीज जीत के हीरोज में से एक रहे. अश्विन ने कुल 10 पारियों में 24.80 की औसत से सबसे ज्यादा 26 विकेट चटकाए. इस दौरान अश्विन ने दो बार पारी में पांच विकेट लिए. 

कप्तान रोहित शर्मा की जीतनी भी तारीफ़ की जाये कम होगी. रोहित की कप्तानी में अलग तरह की परिपक्वता और अताम्विश्वास देखने को मिलता है. किस गेंदबाज को कब गेंद देनी है, रोहित का फिअसला हमेशा सटीक बैठा. रोहित ने कप्तानी के साथ-साथ बल्ले से भी कमाल का खेल दिखाया. रोहित ने इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में 44.44 की औसत से 400 रन बनाए. इस दौरान उनके बल्ले से दो शतक और एक अर्धशतक निकला. राजकोट टेस्ट में भारत पहले ही घंटे में तीन विकेट खोकर मुश्किलों में था, लेकिन रोहित ने शतकीय पारी खेलकर टीम को संकट से उबारा. 

टेस्ट श्रंखला जितने में कुलदीप यादव ने अहम् भूमिका निभाई.कुलदीप यादव मूलत: गेंदबाज हैं, लेकिन उन्होंने इस सीरीज में गेंद के साथ-साथ बल्ले से भी दमदार प्रदर्शन किया. कुलदीप ने 8 पारियों में 20.15 की औसत से 19 विकेट चटकाए. बल्लेबाजी की बात करें तो कुलदीप ने इस सीरीज में छह पारियों को मिलाकर कुल 362 गेंदें खेलकर 97 रन बनाए. कुलदीप को हैदराबाद टेस्ट मैच में खेलने का मौका नहीं मिला लेकिन उसके बाद हर मैच में कुलदीप ने बेहतर से बेहतर प्रदर्शन किया. 

टीम इंडिया की सीरीज जीत में बाएं हाथ के ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा की भी अहम भूमिका रही. जडेजा ने गेंद के साथ-साथ बल्ले से शानदार प्रदर्शन किया. जडेजा ने ..छह पारियों में 38.66 के एवरेज से 232 रन बनाए, जिसमें एक शतक और एक अर्धशतक शामिल रहा. गेंदबाजी की बात करें तो जडेजा ने छह पारियों में 25.05 के  औसत से १९ विकेट भी चटकाए. आज के दिन में जडेजा एक आल राऊंदर के रूप में अपना अहम् स्थान भारतीय टीम में बना चुके हैं.

इसके अलावा श्भामन गिल ने भी बहुत ही सार्थक योगदान दिया.

कुल मिलकर ये कहा जा सकता है कि विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल और विश्व एकदिवसीय कप फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के हाथों जो हार मिली थी ,  बहुत हद तक इस जीत ने हार के ग़म को भुला दिया है. जिस तरह से नए खिलाडियों ने शानदार प्रदर्शन किया है, इससे उम्मीद बनती है की टी 20 विश्व कप में जीत के सूखे को रोहित के सेना समाप्त कर सकती है.